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डेली न्यूज़

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India-SEBI) द्वारा गठित कार्यकारी समूह ने गैर-लाभकारी संगठनों (Non-Profit Organisations) को बॉण्ड जारी करके सीधे सोशल स्टॉक एक्सचेंज (Social Stock Exchanges-SSE) पर सीधे सूचीबद्ध होने की अनुमति देने की सिफारिश की है।

सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकेंगे NGO, सामाजिक और स्वैच्छिक सेवा संगठनों को मिलेगी धन जुटाने की सुविधा

सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर सुझाव देने के लिए गठित इस समिति का कहना है कि ऐसा होने से एसएसई मौजूदा बाजारों की उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

Edited by: India TV Paisa Desk
Updated on: June 02, 2020 9:58 IST

NGOs can directly list on social stock exchanges- India TV Hindi

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NGOs can directly list on social stock exchanges

नई दिल्‍ली पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा गठित एक समिति ने सुझाव दिया है कि निजी मुनाफे के लिए काम न करने वाले संगठन अपने बांड सीधे सोशल स्‍‍‍‍‍‍टॉक

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एक्‍सचेंजों में सूचीबद्ध करा सकते हैं। समिति ने कहा है कि इस तरह के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) मौजूदा शेयर बाजारों में ही स्थापित किए जा सकते हैं।

सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर सुझाव देने के लिए गठित इस समिति का कहना है कि ऐसा होने से एसएसई मौजूदा बाजारों की उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इन बाजारों की गहरी ग्राहक संपर्क सुविधाओं के जरिये निवेशकों, दानदाताओं और सामाजिक उद्यमों (मुनाफा कमाने और बिना मुनाफे वाले दोनों) से संपर्क भी साधा जा सकेगा।

समिति ने पूंजी बाजार नियामक को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इस तरह की सिफारिशें की हैं। समिति ने इसके साथ ही वित्तपोषण के लिए भी कई तरह की प्रणालियां सुझाईं हैं।इनमें एक सुझाव वैकल्पिक निवेश कोष के तहत सामाजिक उद्यम कोष (एवीएफ) का भी सुझाव दिया गया है इसके अलावा एसएसई के तहत धन जुटाने वाले संगठनों के लिए एक नए न्यूनतम रिपोर्टिंग मानक का भी प्रस्ताव किया गया है।

सेबी ने इस समिति का गठन सितंबर 2019 में किया गया था। यह समिति इशहात हुसैन की अध्यक्षता में गठित की गई। हुसैन एसबीआई फांउडेशन के निदेशक और टाटा संस के पूर्व वित्त निदेशक हैं। समिति का गठन एसएसई बनाने का ढांचा सुझाने के लिए किया गया है ताकि सामाजिक संगठनोंं और स्वैच्छिक सेवा संगठनों को धन जुटाने की सुविधा मिल सके।

आईपीओ से फायदे का सौदा, पर सतर्कता जरूरी

हमने शेयर बाजारों के संदर्भ में प्रक्रिया एवं बारीकियों को समझा है तथा साथ ही यह भी समझा है कि भारतीय तथा विदेशी बाजार किस प्रकार कार्य करते हैं। आज हम उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ‘आईपीओ’ या स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने के लाभ ‘प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव’ के विषय में जानते हैं…

प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आईपीओ)-प्रक्रिया व लाभ स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने के लाभ

क्या है आईपीओ : प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने के लाभ निजी स्वामित्व वाली कंपनी अपने हिस्से अथवा शेयरों को आम जनता को बेचकर ‘सार्वजनिक’ बन सकती है। यह एक नई, नवनिर्मित अथवा पुरानी कंपनी हो सकती है, जो अब तक एक निजी कंपनी के रूप में अस्तित्व में थी। जो कंपनी अपने शेयर प्रदान स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने के लाभ करती है, उसे ‘जारीकर्ता’ के रूप में जाना जाता है। आईपीओ के बाद कंपनी के शेयरों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाता है और जनता द्वारा स्वतंत्र रूप से कारोबार किया जा सकता है। सूचीबद्ध होने के पश्चात इन शेयरों का द्वितीयक बाजार में लेन-देन किया जा सकता है।

आईपीओ-प्रक्रिया : यह एक लंबी प्रक्रिया है तथा सर्वप्रथम शेयर बाजार के नियामक सेबी के साथ पंजीकरण करवाना अनिवार्य होता है।

1 निवेश बैंक का चयन

निवेश बैंक एक अंडरराइटर की भूमिका निभाने के साथ-साथ कंपनी को विभिन्न विवरण स्थापित करने में सहायता करता है, जैसे…

-कंपनी कितना पैसा जुटाने की आशा करती है

-प्रतिभूतियों का मिश्रण क्या रहेगा

-प्रारंभिक प्रति शेयर की मूल्य

किसी बड़े आईपीओ के लिए एक से अधिक निवेश बैंक सम्मिलित हो सकते हैं।

2 प्रॉस्पेक्टस बनाना

आईपीओ प्रक्रिया के अगले चरण में प्रॉस्पेक्टस या सूचीपत्र बनाया जाता है, जिसे ‘रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस’ कहते हैं। यह भी अंडरराइटर की सहायता से किया जाता है। इसमें विभिन्न खंड जैसे वित्तीय रिकार्ड, कंपनी की भविष्य की योजना, बाजार में संभावित जोखिम और अपेक्षित शेयर मूल्य सीमा जैसी जानकारियां रहती हैं।

सूचीपत्र से यदि सेबी संतुष्ट होता है तो उसे प्रारंभिक सार्वजनिक (आईपीओ) प्रक्रिया हेतु हरी-झंडी मिल जाती है। इसके साथ ही वह कंपनी को आईपीओ के लिए दिन और समय भी देता है, किंतु यदि सेबी संतुष्ट नहीं होता है तो यह सार्वजनिक निवेशकों के साथ प्रॉस्पेक्टस साझा किए जाने से पहले बदलावों के लिए कंपनी को निर्देश देता है।

जैसा की हमने पहले भी समझा है, लिस्टिंग या सूचीबद्धता वह प्रक्रिया है, जिसमें प्रतिभूतियों को किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूची बद्ध करने के पश्चात उनमें निवेश एवं लेन-देन की अनुमति स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने के लाभ होती है। ऐसा होने से पहले कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज द्वारा भी अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है। एक्सचेंज के विभाग अपने दिशा निर्देशों के अनुरूप कंपनी का प्रस्ताव स्वीकार करते हैं।

प्रकटीकरण दिशानिर्देश : भारतीय बाजारों के नियामक प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के दिशा- निर्देश किसी भी कंपनी या व्यापार के लिए मान्य हो जाते हैं, जब वह सार्वजनिक होने का निश्चय कर लेते हैं। सार्वजनिक होने के बाद एक कंपनी को नियमित प्रकटीकरण विवरणों को तथा इस प्रकार की अन्य वित्तीय जानकारी साझा करने की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, कंपनी अपने शेयरधारकों के प्रति भी उत्तरदायी बन जाती है।

आईपीओ-लाभ :

कंपनी को…

किसी भी व्यापार में पूंजी सर्वोपरि होती है। आधुनिक वित्त व्यवस्था में व्यापार को बढ़ाने का व विस्तारीकरण का सुगम स्त्रोत पूंजी की उपलब्धता है। बाजारों में सूचीबद्ध होकर व्यापार भारत ही नहीं अपितु दुनिया के बाजारों से पूंजी जुटा सकते हैं। अपनी पसंद के व्यापार के विकास से लाभान्वित एवं इनमें शेयरधारक बनने के इच्छुक संस्थान और व्यक्ति ऐसे व्यापार को पूंजी प्रदान कर सकते हैं। इस धन का उपयोग कंपनी के विस्तार, अनुसंधान और विकास तथा अन्य ऐसी गतिविधियों, जिनसे कंपनी को विकसित करने और पैसा बनाने में सहायता होगी, के लिए किया जा सकता है।

निवेशक को…

लिस्टिंग लाभ : कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के पश्चात उसमें कारोबार आबंटन मूल्य से अधिक या कम पर हो सकता है। आरंभिक मूल्य आबंटन मूल्य से अधिक होने पर इसे लिस्टिंग लाभ के रूप में जाना जाता है।

उच्च रिटर्न : यदि कंपनी में बढ़ने की क्षमता है तो आईपीओ में शेयर खरीदने से आपको अच्छा लाभ हो सकता है। आप दीर्घावधि में अच्छा रिटर्न अर्जित कर सकते हैं।

प्रथम प्रस्तावक लाभः जब बड़ी व नामी कंपनियां आईपीओ की घोषणा करती हैं तो आपको कंपनी के शेयरों को कम कीमत पर खरीदने का अवसर मिलता है। कंपनी के शेयर द्वितीयक बाजार में पहुंचने पर शेयर की कीमत तेजी से बढ़ सकती है।

चलते-चलते

जागरूक रहने के कई लाभ हैं तथा आप अच्छे निवेशों से सुदृढ़ भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।

सचेत रहिए व स्वस्थ रहिए।

संपर्कः [email protected]

नोट : यहां दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से दी गई है। किसी भी निवेश से पहले उसकी पूरी जानकारी अवश्य लें।

शेयर बाजार में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की सूचीबद्धता पर मसौदा दिशानिर्देश जारी

नयी दिल्ली, दो अक्टूबर (भाषा) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए सरकार ने मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिन पर खरा उतरने वाले इस श्रेणी के बैंक शेयर बाजार में सूचीबद्ध होकर वित्तीय संसाधन जुटा सकेंगे। इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पास बीते तीन वर्ष के दौरान कम-से-कम 300 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति होनी चाहिए तथा इस दौरान उनकी पूंजी पर्याप्तता भी नौ फीसदी के न्यूनतम नियामक स्तर से अधिक होनी चाहिए।वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी मसौदा दिशा-निर्देश में कहा गया है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की मंशा रखने वाले आरआरबी का लाभ अर्जित

इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पास बीते तीन वर्ष के दौरान कम-से-कम 300 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति होनी चाहिए तथा इस दौरान उनकी पूंजी पर्याप्तता भी नौ फीसदी के न्यूनतम नियामक स्तर से अधिक होनी चाहिए।

वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी मसौदा दिशा-निर्देश में कहा गया है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की मंशा रखने वाले आरआरबी का लाभ अर्जित करने का रिकॉर्ड होना चाहिए। यह भी जरूरी है कि बीते पांच साल में से कम-से-कम तीन साल उन्हें न्यूनतम 15 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ कमाया हो।

मसौदा नियमों के अनुसार, अपना आरंभिक सार्जनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए उपयुक्त बैंक की पहचान करने की जिम्मेदारी इन ग्रामीण बैंकों के प्रायोजक बैंकों पर छोड़ दी गई है। आईपीओ के लिए उपयुक्त आरआरबी का चयन करते समय प्रायोजक बैंक को पूंजी जुटाने और खुलासा आवश्यकताओं संबंधी सेबी और आरबीआई के नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

गौरतलब है कि कृषि कर्ज में अहम भूमिका निभाने वाले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ही प्रायोजित करते हैं। मौजूदा समय में 43 आरआरबी हैं जिनके प्रायोजक सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंक हैं।

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