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क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों के साथ इतना जबरदस्त फ्रॉड हो रहा है, आप ये वीडियो देखकर चौंक जाएंगे

Nowadays a lot of frauds are happening in the name of crypto. This video is made to prevent fraud in the name of crypto. The purpose of making this video is to make you aware before investing in cryptocurrencies by watching this.

बन रही है डिजिटल करेंसी की नींव: सरकारी बांड में जनता का निवेश देश को डिजिटल करेंसी की तरफ ले जाएगा

RBI छोटे निवेशकों (रिटेल निवेशक) यानी, आम जनता को RBI में गिल्ट अकाउंट खोलकर खुद सरकारी बांड खरीदने की सुविधा देने की योजना पर काम कर रहा है - Dainik Bhaskar

छोटे निवेशकों को सरकारी बांड में खुद निवेश करने की सुविधा देने का प्रयोग यदि सफल रहता है, तो यह देश लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे को एक ऐसी डिजिटल करेंसी की तरफ ले जा सकता है, जिसे रखने वाले निवेशकों को इसके वैल्यू पर ब्याज भी मिलेगा। यह बात ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है। RBI छोटे निवेशकों (रिटेल निवेशक) यानी, आम जनता को RBI में गिल्ट अकाउंट खोलकर खुद सरकारी बांड खरीदने लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे की सुविधा देने की योजना पर काम कर रहा है।

सरकारी बांड में छोटे निवेशकों को निवेश करने देने की योजना को विशेषज्ञों की भाषा में रिटेल डायरेक्ट कहा जा रहा है। हालांकि इसकी सफलता में कई लोगों को संदेह है, क्योंकि पहले भी ऐसी कोशिशें हुई थीं, जो सफल नहीं हुईं। लेकिन रिपोर्ट में बताया गया है आम आदमी जो डिजिटल सरकारी बांड रखेंगे, उसी का उपयोग ब्लॉकचेन के जरिये लेन-देन में किया जा सकता है, और वही लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे देश को डिजिटल करेंसी की तरफ ले जा सकता है।

कई देशों में डिजिटल करेंसी के पक्ष में माहौल बनता जा रहा है

कई देशों में डिजिटल करेंसी के पक्ष में माहौल बनता जा रहा है। कोरोनावायरस महामारी के बाद इन्फेक्शन के डर से लोग नोट और सिक्कों का इस्तेमाल घटा रहे हैं। बिटक्वॉइन जैसी कई क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता और फेसबुक भी क्रिप्टोकरेंसी डियम (पहले इसे लिब्रा कहा गया था) की चर्चा के बाद दुनियाभर के अधिकारी अब डिजिटल करेंसी पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

डिजिटल करेंसी नहीं लाने से मौद्रिक संप्रभुता पर खतरा

यदि कोई देश अपनी डिजिटल करेंसी नहीं लाता है, तो बाजार में प्राइवेट या अन्य देशों की डिजिटल करेंसी छा जाएगी। इससे विकासशील देशों की जो कुछ भी मौद्रिक संप्रभुता है, वह भी खत्म हो सकती है। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) के एक ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी को अगले 3 साल में केंद्रीय बैंक की डिजिटल करेंसी मिल सकती है। साथ ही डिजिटल करेंसी की संभावना को खारिज नहीं करने वाले दूसरे क्षेत्राधिकारों (जुरिस्डिक्शन) का अनुपात भी बढ़कर 21% पर पहुंच गया है, जो 2019 के सर्वेक्षण में सिर्फ 14% था।

डिजिटल करेंसी की दौड़ में भारत चीन व EU से पीछे

चीन में डिजिटल करेंसी पर पायलट चल रहा है। यूरोपीय संघ (EU) इसके बारे में जनता के बीच की गई रायशुमारी जल्द ही प्रकाशित करने वाला है। भारत हालांकि डिजिटल करेंसी जारी करने की दौड़ में पीछे चल रहा है। RBI ने पिछले महीने कहा था कि वह डिजिटल करेंसी की जरूरत की समीक्षा कर रहा है। वह यह भी देख रहा है कि यदि इसकी जरूरत है, तो इसका परिचालन कैसे किया जाए।

डिजिटल बांड पर जनता को ब्याज भी मिलेगा

बेंगलुरु की फिनटेक कंपनी सेतु के स्ट्रैटेजी हेड कृष्णा हेगड़े ने कहा कि सरकारी बांड में छोटे निवेशकों को सीधे तौर पर निवेश करने की सुविधा (रिटेल डायरेक्ट) देना डिजिटल करेंसी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस मामले में RBI कमर्शियल बैंकों को कस्टोडियन बना सकता है। आम आदमी अपने बैंक के कंस्टीट्यूएंट्स सब्सिडियरी जनरल लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे लेजर अकाउंट के जरिये सरकारी बांड में निवेश कर सकते हैं। इन अकाउंट्स के बीच यदि पैसे बिना किसी बाधा के घूम सकेंगे, तो भारत को एक तरह से अपनी डिजिटल करेंसी मिल जाएगी। बांड पर ब्याज मिलता है, इसलिए यह ऐसी करेंसी होगी, जिस पर निवेशक को ब्याज भी मिलेगा।

पेमेंट बैंक डिजिटल बांड की खरीदारी को बढ़ावा दे सकते हैं

बैंकों को कम ब्याज दर पर बचत खाते में जनता से पैसे मिल जाता है। बांड पर ज्यादा ब्याज मिलता है। इसलिए जनता बैंक में पैसा न रखकर बांड में लगाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। इसलिए संभव है कि बैंक बांड में लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे जनता की सीधी पहुंच को लोकप्रिय बनाने पर ज्यादा ध्यान न दें। लेकिन पेमेंट बैंक इसे बढ़ावा दे सकते हैं। पेटीएम के चेयरमैन विजय शेखर शर्मा ने कहा कि हम रिटेल डायरेक्ट को पेटीएम का एक प्रमुख फीचर बनाएंगे। गिल्ट सिक्युरिटी के जरिये हम ग्राहकों को ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा यील्ड वाला प्रॉडक्ट ऑफर कर सकेंगे।

ब्लॉकचेन डिजिटल बांड को डिजिटल करेंसी बनाएगा

क्या आपसी लेनदेन में बांड का ऊंचा यील्ड बना रह पाएगा? यह इस बात पर निर्भर करता है कि ये बांड कितना लिक्विड होंगे और इसे ऑफर करने में कंपनियों को कितनी लागत आएगी। इसी जगह पर ब्लॉकचेन की भूमिका आती है। इसके जरिये डिजिटल बांड का ऑटोमैटिक ट्र्रेड सेटलमेंट होगा। इससे सेटलमेंट में तेजी भी आएगी और इसकी लागत भी घटेगी। इससे ये बांड लेन-देन का जरिया बन जाएंगे। जैसे आज लोग कॉफी शॉप पर कमर्शियल बैंक के अपने खाते से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं, वैसे ही वे RBI के अपने गिल्ट खाते से भी दुकानों पर डिजिटल बांड के रूप में भुगतान कर सकेंगे। यही डिजिटल करेंसी का प्रोटोटाइप हो सकता है। RBI इसी जगह से डिजिटल करेंसी की दिशा में बढ़ने का प्रयोग कर सकता है।

Bitcoin Mutual Fund में निवेश करने से पहले जान लें 8 बातें

बिटकॉइन या बिटकॉइन फ्यूचर्स में निवेश करने वाले एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड शुरू करने के लिए कई फर्मों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन अमेरिकी नियामकों द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। 2021 में दूसरी बार, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने जून में बिटकॉइन ईटीएफ को मंजूरी देने या न करने के फैसले को स्थगित कर दिया।

Bitcoin Mutual Fund में निवेश करने से पहले जान लें 8 बातें

Representations of cryptocurrency Bitcoin are seen in this picture illustration taken June 7, 2021. REUTERS/Edgar Su/Illustration

प्रो फंड्स ने एक नया म्यूचुअल फंड लॉन्च किया है, जो व्यापारियों को बिटकॉइन में संपत्ति खरीदे बिना निवेश करने की अनुमति देगा। बिटकॉइन रणनीति संयुक्त राज्य अमेरिका में बिटकॉइन वायदा अनुबंधों में निवेश करने वाला पहला म्यूचुअल फंड है। फंड का लक्ष्य शुल्क और शुल्क से पहले दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल संपत्ति के प्रदर्शन की निगरानी करना है।

बिटकॉइन या बिटकॉइन फ्यूचर्स में निवेश करने वाले एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड शुरू करने के लिए कई फर्मों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन अमेरिकी नियामकों द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। 2021 में लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे दूसरी बार, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने जून में बिटकॉइन ईटीएफ को मंजूरी देने या न करने के फैसले को स्थगित कर दिया। आइए आपको भी बताते हैं कि बिटक्‍वाइन म्‍यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले आपको इन बातों का ध्‍यान रखना काफी जरूरी है।

बिटकॉइन म्‍यूचुअल फंड में निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्‍यान : 1) बिटकॉइन और बिटकॉइन फ्यूचर्स नए एसेट क्लास हैं, और बिटकॉइन मार्केट अस्थिर है। बिटकॉइन और बिटकॉइन फ्यूचर्स अद्वितीय और महत्वपूर्ण जोखिमों का सामना करते हैं, जैसे कि मूल्य अस्थिरता और तरलता की कमी।

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2) फंड में निवेश करने से बहुत जल्दी और बिना किसी चेतावनी के, यहां तक कि शून्य तक, काफी मात्रा में धन का नुकसान हो सकता है। आपको अपना सारा पैसा खोने की उम्मीद करनी चाहिए।

3) बिटकॉइन फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स फंड द्वारा किए गए निवेशों में से हैं। फंड सीधे बिटकॉइन को होल्ड या निवेश नहीं करता है। बिटकॉइन वायदा कीमतों को बिटकॉइन की वर्तमान या “स्पॉट” कीमत से अलग होने की उम्मीद की जानी चाहिए। नतीजतन, फंड के प्रदर्शन को बिटकॉइन स्पॉट प्राइस के प्रदर्शन से अलग होने की उम्मीद की जा सकती है।

4) बिटकॉइन वायदा बाजार अधिक स्थापित वायदा बाजारों की तुलना में कम विकसित, कम तरल और अधिक अस्थिर होने की संभावना है। बिटकॉइन फ्यूचर्स पर मार्जिन सीमाएं, संपार्श्विक आवश्यकताएं और दैनिक सीमाएं लागू होती हैं, जो फंड को अपने लक्ष्य को पूरा करने से रोक सकती हैं।

5) क्योंकि बिटकॉइन अनिवार्य रूप से अनियमित है, यह अन्य, अधिक विनियमित निवेशों की तुलना में धोखाधड़ी और हेरफेर के लिए अधिक संवेदनशील है। बिटकॉइन की कीमत में नाटकीय रूप से उतार-चढ़ाव होता है।

6) किसी भी कारण से, जिसमें लिक्विडिटी की कमी, बिटकॉइन फ्यूचर्स मार्केट में अस्थिरता या व्यवधान, या फंड पर लागू मार्जिन आवश्यकताएं या स्थिति सीमाएं शामिल हैं, फंड अपने निवेश उद्देश्य को प्राप्त करने में असमर्थ हो सकता है और नुकसान उठा सकता है।

7) प्रो फंड्स सोफ‍ेस्टिकेटिड तकनीकों का उपयोग करते हैं जो सभी निवेशकों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती हैं।

8) नया म्यूचुअल फंड निवेशकों को हार्डवेयर वॉलेट या एक्सचेंज कस्टोडियल सॉल्यूशन को अलग से संभालने के बिना बिटकॉइन की कीमत में भाग लेने की अनुमति देता है।

म्यूचुअल फंड व्यक्तिगत निवेशकों को पेशेवर रूप से प्रबंधित पोर्टफोलियो तक पहुंच प्रदान करते हैं, लेकिन स्टॉक और ईटीएफ के विपरीत, उन्हें प्रति दिन केवल एक बार खरीदा या बेचा जा सकता है, और उन्हें पूरे दिन में एक्सचेंज नहीं किया जा सकता है। कुछ व्यक्ति और संगठन विनियमित उत्पादों को खरीदना चुनते हैं। बिटकॉइन बाजार की जटिलताएं अक्सर म्यूचुअल फंड की तुलना में
रोजमर्रा के निवेशकों के लिए काफी अधिक परिचित होती हैं।

Cryptocurrency और Digital Currency में क्या अंतर है? आसान शब्दों में समझिए

Cryptocurrency और Digital Currency में क्या अंतर है? आसान शब्दों में समझिए

Cryptocurrency Vs Digital Currency क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी दो अलग-अलग चीजें हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद इस बात को स्पष्ट किया है कि क्रिप्टोकरेंसी कोई डिजिटल करेंसी है। डिजिटल करेंसी वो होता है जिसे केंद्रीय बैंक जारी करता है।

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को अपने बजट 2022-23 के भाषण के दौरान डिजिटल संपत्ति, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और अपूरणीय टोकन (NFTs) शामिल हैं, उनके हस्तांतरण से होने वाली किसी भी आय पर 30 प्रतिशत कर लगाने की घोषणा की। और, इसके तुरंत बाद वित्त मंत्री ने भारत की अपनी डिजिटल करेंसी का भी ऐलान कर दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही अपनी डिजिटल करेंसी जारी करेगा। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को वित्त वर्ष 2022-23 किसी समय जारी किया जा सकता है।

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डिजिटल संपत्ति के लिए कराधान की घोषणा के तुरंत बाद सीबीडीसी की घोषणा ने बहुत से लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सीबीडीसी पर भी कर लगेगा। ऐसे इसीलिए हुआ क्योंकि ज्यादातर लोग क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी को एक ही मान रहे हैं। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को साफ किया क्रिप्टोकरेंसी (उन्होंने सिर्फ क्रिप्टो ही बोला था, इसके आगे करेंसी नहीं जोड़ा था) कोई करेंसी नहीं है। करेंसी वो होती है, जिसे केंद्रीय बैंक जारी करता है, जिसे वह इस साल जारी करेगा।

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क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी में अंतर?

डिजिटल करेंसी अनिवार्य रूप से सरकार द्वारा जारी करेंसी का इलेक्ट्रॉनिक रूप है जबकि क्रिप्टोकरेंसी मूल्य का एक भंडार है, जो एन्क्रिप्शन के द्वारा सुरक्षित है। क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल संपत्ति कहलाती हैं जबकि डिजिटल करेंसी कोई डिजिटल संपत्ति नहीं है। लोगों ने विशेष रूप से महामारी के दौरान जिन लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे लिक्विड क्रिप्टोकरेंसी में निवेश क्यों करे डिजिटल वॉलेट का उपयोग करना शुरू किया, उनमें डिजिटल करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी, दोनों हो सकते हैं लेकिन यह दोनों वास्तव में एक दूसरे से अदली-बदली नहीं जा सकती हैं।

चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में 19,485 करोड़ के फ्राड हुए।

डिजिटल करेंसी, मौजूदा पेपर मनी (नोट) का इलेक्ट्रॉनिक रूप है। यह संपर्क रहित लेनदेन में उपयोग की जा सकती है, जैसे- आपके बैंक खाते से इलेक्ट्रॉनिक रूप से किसी और को भुगतान करना। सभी ऑनलाइन लेनदेन में डिजिटल करेंसी शामिल होती है। हालांकि, जब आप उस पैसे को बैंक या एटीएम से निकाल लेते हैं, तो वह डिजिटल करेंसी, तरल नकदी में बदल जाती है।

क्रिप्टोक्यूरेंसी मूल्य का एक भंडार है, जो एन्क्रिप्शन द्वारा सुरक्षित है। क्रिप्टोक्यूरेंसी निजी स्वामित्व में हैं और इन्हें उन्नत ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। अभी तक अधिकांश देशों में क्रिप्टोक्यूरेंसी को नियमित नहीं किया गया है। हालांकि, डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक द्वारा नियमित होती है।

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डिजिटल करेंसी को एन्क्रिप्शन की आवश्यकता नहीं है लेकिन हैकिंग और चोरी की संभावना को कम करने के लिए सभी उपयोगकर्ताओं को अपने डिजिटल वॉलेट और बैंकिंग ऐप को मजबूत पासवर्ड तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ सुरक्षित करने की आवश्यकता होती है। यही बात डेबिट और क्रेडिट कार्डों पर भी लागू होती है, जिनसे डिजिटल करेंसी में लेनदेन किया जाता है।

क्रिप्टोकरेंसी को मजबूत एन्क्रिप्शन द्वारा संरक्षित किया जाता है और क्रिप्टो में व्यापार करने के लिए उपयोगकर्ताओं के पास बैंक अकाउंट होना चाहिए, जिससे वह डिजिटल करेंसी (बैंक खाते में पैसे) से बदले ऑनलाइन तरीके से संबंधित मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी खरीदता है। इसे ऐसे समझिए कि आपके बैंक खाते में 100 रुपये हैं और आपने उन 100 रुपये का टिजिटल तरीके से कोई सामान (जिसकी मौजूदा कीमत 100 रुपये है) खरीदा है।

सिल्वर ETF से निवेशकों को पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन में मिलेगी मदद, सेबी ने तय किए नियम

वर्तमान में म्यूचुअल फंड इकाइयों को गोल्ड ईटीएफ पेश करने की ही अनुमति है। लेकिन नए प्रावधान आने के बाद सिल्वर ईटीएफ का रास्ता भी खुल गया है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: November 28, 2021 14:25 IST

सिल्वर ETF से निवेशकों. - India TV Hindi

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सिल्वर ETF से निवेशकों को पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन में मिलेगी मदद, सेबी ने तय किए नियम

Highlights

  • नियम आने के साथ अब निवेशक चांदी में अधिक तरल तरीके से निवेश कर सकेंगे
  • सेबी ने कुछ दिन पहले ही चांदी ईटीएफ के लिए परिचालन मानदंड जारी किए हैं
  • अब लोग सिल्वर ईटीएफ में निवेश करके चांदी भी रख सकेंगे

नयी दिल्ली। सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के लिए नियम आने के साथ अब निवेशक चांदी में अधिक तरल तरीके से निवेश कर सकेंगे और इससे उन्हें पोर्टफोलियो के विविधीकरण में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ दिन पहले ही चांदी ईटीएफ के लिए परिचालन मानदंड जारी किए हैं। इसके तहत ऐसी निवेश योजना को चांदी और चांदी से संबद्ध उत्पादों में कम से कम 95 प्रतिशत का निवेश करना होगा। ये मानदंड नौ दिसंबर, 2021 से प्रभावी होंगे।

वर्तमान में म्यूचुअल फंड इकाइयों को गोल्ड ईटीएफ पेश करने की ही अनुमति है। लेकिन नए प्रावधान आने के बाद सिल्वर ईटीएफ का रास्ता भी खुल गया है। नियो के रणनीति प्रमुख स्वप्निल भास्कर ने कहा, ‘‘अब लोग सिल्वर ईटीएफ में निवेश करके चांदी भी रख सकेंगे। चूंकि यह एक उच्च विनियमन वाला उत्पाद है, इसलिए निवेशक इसकी शुद्धता के बारे में निश्चित होंगे। खुले बाजार से चांदी लेने पर उन्हें ऐसी निश्चिंतता नहीं मिलती है।’’

महिलाओं के वित्तीय मंच एलएक्सएमई की संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता ने कहा, ‘‘अब निवेशक चांदी में निवेश के पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तरल तरीके से निवेश कर सकेंगे।’’ उन्होंने कहा कि इससे पोर्टफोलियो के विविधीकरण में भी मदद मिलेगी क्योंकि सोने के बाद चांदी को भी बहुमूल्य धातु की श्रेणी में रखा जाता है।

निप्पन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड के ईटीएफ उप-प्रमुख हेमेन भाटिया ने कहा, ‘‘निवेशकों के लिए सोने के बाद अब पारदर्शी तरीके से एक जिंस के रूप में चांदी में निवेश करना बहुत सुविधाजनक हो जाएगा।’’ नियमों के तहत सिल्वर ईटीएफ योजना में चांदी की कीमत को लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन या एलबीएमए के चांदी के दैनिक हाजिर मूल्य के आधार पर बेंचमार्क किया जाएगा। ऐसे ईटीएफ का शुद्ध संपत्ति मूल्य (एनएवी) एएमसी की वेबसाइट पर डाला जाएगा।

इस कदम से निवेशकों को कीमती धातु का अधिक वास्तविक मूल्य निर्धारण मिलेगा। ये मानदंड गोल्ड ईटीएफ के लिए मौजूदा नियामकीय तंत्र के अनुरूप हैं, क्योंकि सेबी ने एलबीएमए के माध्यम से एएमसी के लिए खुद 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी की छड़ें रखने की प्रथा को जारी रखा है। इससे खुदरा निवेशकों को शुद्धता, जोखिम, भंडारण और बीमा की चिंता किए बिना चांदी के ईटीएफ में निवेश करने की अनुमति मिलेगी।

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