अगर में जीएचआई में भारत के खराब प्रदर्शन की बात सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक करें, तो यह बीते कुछ सालों से लगातार जारी है. 2017 में इस सूचकांक में भारत का स्थान 100वां था. साल 2018 के इंडेक्स में भारत 119 देशों की सूची में 103वें स्थान पर रहा, वहीं सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक 2019 में देश 117 देशों में 102वें स्थान पर रहा था.

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स: भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे

साल 2021 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत पिछले साल के 94वें स्थान से फिसलकर 101वें पायदान पर पहुंच गया है. आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी के संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘चिंताजनक’ बताया गया है.

साल 2021 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत पिछले साल के 94वें स्थान से फिसलकर 101वें पायदान पर पहुंच गया है. आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी के संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘चिंताजनक’ बताया गया है.

अप्रैल 2020 में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान ज़रूरतमंदों को खाना बांटते स्वयंसेवी समूहों के सदस्य. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत 116 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई) 2021 में फिसलकर 101वें स्थान पर आ गया है. इस मामले में वह अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है. वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था.

भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट पर बृहस्पतिवार को बताया गया कि चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया है.

जनवरी 2013 के बाद से चीन का कारोबारी भरोसा सबसे निचले स्तर पर: सर्वे

बीजिंग: बिक्री प्रबंधकों के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि चीन का व्यापार विश्वास जनवरी 2013 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जो कई महामारी नियंत्रण उपायों के अचानक उठाए जाने के साथ आर्थिक गतिविधियों पर बढ़ते कोविड मामलों के प्रभाव को दर्शाता है।

सर्वेक्षण के नतीजे इस बात के पहले संकेतक थे कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में 7 दिसंबर को सख्त कोविड नियंत्रण उपायों की तेज छूट के बाद से चीन में घरेलू कोविड मामलों की अभी भी बढ़ती लहर के कारण कारोबारी धारणा सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक प्रभावित हुई है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक्स का सर्वे 2,300 से ज्यादा कंपनियों के सेल्स मैनेजर्स पर किया गया था और इस साल 1 से 16 दिसंबर के बीच कराया गया था. सर्वेक्षण में कहा गया है कि चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस साल सिर्फ 3 सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, यह लगभग आधी सदी में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। वर्ल्ड इकोनॉमिक्स ने सोमवार को कहा, "सर्वेक्षण दृढ़ता से सुझाव देता है कि चीनी अर्थव्यवस्था की विकास दर नाटकीय सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक रूप से धीमी हो गई है, और 2023 में मंदी की ओर बढ़ सकती है।"

ग्लोबल हंगर इंडेक्स: भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे

साल 2021 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत पिछले साल के 94वें स्थान से फिसलकर 101वें पायदान पर पहुंच गया है. आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी के संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘चिंताजनक’ बताया गया है.

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अप्रैल 2020 में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान ज़रूरतमंदों को खाना बांटते स्वयंसेवी समूहों के सदस्य. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत सबसे लोकप्रिय स्तर संकेतक 116 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई) 2021 में फिसलकर 101वें स्थान पर आ गया है. इस मामले में वह अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है. वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था.

भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट पर बृहस्पतिवार को बताया गया कि चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया है.

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मोदी सरकार के लिए चुनौती बनेंगे ये नंबर, दिवाली से पहले बढ़ी परेशानी

Updated Oct 7, 2022 | 08:18 PM IST

क्या मेस्सी भी इतिहास में पोस्ट-ग्रेजुएट थे? इतिहास वाले RBI गवर्नर के तंज पर शक्तिकांत दास ने दिया जवाब

Narendra Modi And Nirmala Sitharaman

फाइल फोटो: पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

  • विश्व बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ रेट के अनुमान में एक फीसदी की कटौती कर दी है।
  • सर्विस सेक्टर 6 महीने के निचले स्तर पर आ गया है।
  • ओपेक प्लस देशों के फैसले से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत मिलने की कम उम्मीद ।

Indian Economy Challenge : दिवाली नजदीक है, उम्मीद थी कि त्योहारों पर महंगाई (Inflation)से राहत मिलेगी, और लोगों के जेब में ज्यादा पैसा आएगा। लेकिन ऐसा होते नहीं दिख रहा है। इसकी सबसे ताजा वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर ओपेक प्लस (OPEC +) देशों का फैसला है। जिसमें उन्होंने तेल उत्पादन में कटौती का फैसला कर दिया है। ऐसे में पहले से ही मंदी की आशंका से बिगड़े वैश्विक माहौल में ओपेक प्लस का फैसला और महंगाई बढ़ाएगा। इसी तरह सितंबर महीने में भारतीय सर्विस सेक्टर (PMI) का आंकड़ा भी उम्मीदों भरा नहीं रहा है। इसके बाद विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट ने रही सही कसर पूरी कर दी है। उसने भारत की ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) का अनुमान एक फीसदी घटा दिया है।

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